खांसी-दमा में वरदान है अडूसा, जानिए इसके फायदे

प्रकृति ने हमे ऐसी वनस्पतियाँ दी है जिनका सेवन करने से आसाध्य रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है | इन्हीं में से एक वनस्पति है – अडूसा जिसे वासा, वसाका, अडूसा पत्ता या अंग्रेज़ी में Malabar Nut (Adhatoda vasica/Justicia adhatoda) कहा जाता है |

आयुर्वेद की एक अत्यंत उपयोगी औषधीय है। यह भारत, नेपाल एवं श्रीलंका में सामान्य रूप से पाई जाती है। इसके पत्ते, जड़, फूल और तना सभी औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं | लेकिन सबसे अधिक उपयोग इसके पत्तों का होता है। आयुर्वेद में वासा को कफनाशक, श्वसन-समर्थक और रक्तशोधक माना गया है।

अडूसा खाने के फायदे

1. खांसी और सर्दी में अत्यंत लाभकारी

अडूसा का सबसे प्रसिद्ध उपयोग खांसी के उपचार में होता है। यह बलगम को पतला करके बाहर निकालने में मदद करता है, इसलिए इसे कफनाशक कहा जाता है। सूखी खांसी हो या बलगम वाली, दोनों में अडूसा राहत देता है। आयुर्वेदिक सिरप, काढ़ा और चूर्ण के रूप में इसका व्यापक प्रयोग किया जाता है।

अडूसा श्वसन नलियों को खोलने एवं फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक एल्कलॉइड्स (जैसे वासिसिन) ब्रोंकोडायलेटर की तरह काम करते हैं, जिससे दमा, ब्रोंकाइटिस और सांस फूलने जैसी समस्याओं में आराम मिलता है।

अडूसा फेफड़ों में जमे विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक माना जाता है। धूल, प्रदूषण या धूम्रपान के कारण फेफड़ों पर पड़े नकारात्मक प्रभाव को कम करने में वासा का प्रयोग उपयोगी मन गया है।

2. रक्तशोधक (ब्लड प्यूरीफायर) के रूप में उपयोग

अडूसा रक्तशोधक एवं शरीर को विषैले पदार्थों से मुक्त करने में मदद करता है | इसका सेवन करने से त्वचा सम्बंधित समस्याएँ जैसे फोड़े-फुंसी, मुंहासे और खुजली से निजात मिलती है |

3. बुखार में सहायक

अडूसा में ज्वरनाशक गुण पाए जाते हैं। यह विशेष रूप से संक्रमण या सर्दी-खांसी से जुड़े पुराने बुखार के इलाज में लाभ पहुंचाता है । अडूसे का काढ़ा शरीर के तापमान को संतुलित करने में मदद कर सकता है।

4. पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करता है

वैसे तो मुख्य रूप से अडूसा स्वास सम्बंधित रोगों में लाभप्रद है इसके सिवा ये पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। मुख्य रूप से यदि आपका पाचन कफ सम्बंधित समस्याओं से प्रभावित है | यह अपच, गैस और हल्की कब्ज में राहत देने में सहायक हो सकता है |

5. पेचिस

पेचिस का रोग जिसमें रोगी को मल के साथ आंव आने की समस्या परेशान करती है | ऐसी स्थिति में अडूसे का सेवन अनुशंसित किया जाता है

6. प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) को मजबूत करता है

नियमित और संतुलित मात्रा में अडूसा का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। यह संक्रमण से लड़ने की ताकत बढ़ाता है, खासकर बदलते मौसम में।

7. सूजन और दर्द में राहत

अडूसा में सूजनरोधी (Anti-inflammatory) गुण होते हैं। जोड़ों में सूजन, हल्का दर्द या चोट के कारण होने वाली सूजन में इसका लेप या काढ़ा लाभकारी माना जाता है।

आयुर्वेदिक औषधियों में व्यापक उपयोग

अडूसा का उपयोग कई प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवाओं जैसे वासा अवलेह, वासा अर्क, कफ सिरप आदि में किया जाता है। यह इसकी औषधीय महत्ता को दर्शाता है।

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