मानसिक तनाव के कारण एवं इससे बहार आने के सुझाव:-

मानसिक तनाव के कारण:-

आज का मनुष्य तनाव में है तो क्यों ?

पशु तनाव में नहीं पक्षी तनाव में नहीं अन्य सभी जिनके पास मानव से कम क्षमता है तनाव में नहीं पर ये मानव तनावग्रस्त है तो क्यों ?

पहला कारण तो यह की यह मानव कभी संतुष्ट ही नहीं होता, इसे जो मिल गया है उसके लिए कभी उस परमात्मा का शुक्रगुजार नहीं होता | इसे जो मिल गया है सदा उससे और अधिक चाहिए | एक इच्छा पूरी होते ही वह दूसरी पर ऊँगली रख देता है|

हर वक़्त वह पीड़ा में है, आनंद के तो बस दो-चार पर ही उसकी झोली में है | ‘अभी’ पर इसकी नज़र नहीं, इसे सदा आने वाली कल की चिन्ता है |

आज को, इस पल को कभी नहीं जीता यह | जो मिल गया है उसे जीता नहीं | यह ख़ुशी का जो पल मिल गया है उसे बाँध लेना चाहता है | वह पल इसे बार-बार चाहिए और उन पलों पर अपना एकाधिकार चाहिए इसे, स्वार्थी है | यह तो पीड़ा देने वाले पलों को भी नहीं छोड़ता, उन्हें भी बार-बार दोहरा कर दुःखी होता रहता है | ऐसा नादान है ये |

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ये नादानियाँ बुद्धि नहीं करती , यह सब मन करता है | इसका मतलब है मानव के सारे दुखों के जड़ यह मन है, तो इस मन को जाना जाएं |

यह निष्कर्ष निकल जाने के बाद की मानव के सारे तनाव की जड़ ये मन है | सभी भाई बहनों ने इस मन को जानने परखने वे देखने की चेष्टा की |

मन क्या है ?
इसकी तस्वीर खींचने की चेष्टा की गयी | मन को इसके क्रियाकल्पों से ही जाना जा सकता है | सभी ने मिलकर इसकी विशेष्टाओं को खोजा और पाया की यह बुहत चंचल है तथा गतिशील है | कहते है जहा ना पुँहचे रवि वह पुँहचे कवी |

कवी वहाँ अपने इसी मन के बल पर ही पहुँच पाता है | कवी मन की कल्पना शक्ति ही उसे उन दुर्गम स्थानों में पहुँचा देती है जहाँ सूर्ये की किरणों भी नहीं पहुँच पाती | ये मन यदि हार जाएं तो मनुष्य हार जाता है पर यह मन यदि मजबूत बना रहे तो आदमी मौत के मुँह से भी लौट आता है |

यह मन ही सारे झगड़ो की जड़ है :-

कहते है शरीर पर लगा घाव दो चार दिन में गहरा हो तो महीने दो महीने में भर जाता है पर इस मन का घाव जीवन भर नहीं सूखता | नित-नित हरा होता रहता है और टीस्ता रहता है | मन को जो शब्द अच्छे नहीं लगते उनसे दुखता रहता है और जो इसे भा जाते है उन्हें यह बार-बार सुनना चाहता है | मन के इसी दुर्गुण ने हमें सभी का गुलाम बना दिया है |

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मनुष्य जो सृष्टि का सर्वश्रेष्ट प्राणी है –
जो ईश्वर की बनाई सर्वोत्कृष्ट कृति है, जिससे शरीर की एक-एक कोशिका एक-एक फैक्ट्री है, जिसके मस्तिष्क के हज़ारो न्यूरोन्स बेहद ऊर्जा से भरे है वह मनुष्य अगर दुःखी है, तनाव ग्रस्त है, कष्ट में है तो केवल इस मन के हाथों | यह मन कभी राजी हो जाता है तो कभी नाराज | राजी हो जाता है तो वही चीज़ बार-बार माँगता है और राजी नहीं होता तो दुःख देता रहता है | इस पल के लिए तो दुःखी होता ही है, कई बार बरसों पहले की घटना को याद करके भी दुःख पाता है | इसी ने हम सबको गुलाम बना दिया है|

हम गुलाम है तारीफ करने वालों के भी और गाली देने वालों के भी | कोई तारीफ का बटन दबाकर, दो शब्द कहकर हमें प्रसन्न कर सकता है और दूसरे ही पल कोई दूसरा कुछ गलत शब्दों का प्रयोग कर अर्ताथ गाली देकर हमें दुःखी कर सकता है | इसका मतलब है मेरा अपना कोई अस्तित्व ही नहीं है, हम तो दूसरों के हाथ की कटपुतली है

वो सारे लोग, वो परिस्थितियाँ, वो साड़ी घटनाएँ मेरी मालिक हैं | ये सब कभी भी मुझे दुखी या सुखी कर देते है | जब तक हम अपने मालिक नहीं बनते, स्वतंत्र नहीं होते, तब तक हम तनाव रहित नहीं हो सकते |

तनाव का कारण हमारा यह मन है | यह मन व्यक्तियों, घटनाओं, परिस्तिथियों से प्रभवित है | दुःख ही नहीं ख़ुशी भी तनाव का कारण बनती है, क्योंकि खुशी के लिए जिम्मेदारी घटना शब्द या परिस्थिति तो पल दो पल के लिए आती है और हम चाहते है की यह स्तिथि बनी रहे, हमारी यही चाहत यही आकांक्षा ही तो तनाव का कारण है |

बीमारी का कारण पकड़ में आ जाएं तो उससे छुटकारा पाना आसान हो जाता है | हमने समझ लिया है की तनाव का कारण गुलामी है और यदि हम अपने मालिक बन जाएँ तो तनाव मुक्त हो सकते है |