शहद खाने के गुण एवं फायदे

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शहद का सेवन करने से पित्त तथा कफ प्रकृति वाले लोग सभी इसका सेवन कर सकते हैं। कई तरह की देशी विदेशी दवाएं ऐसी हैं जो शहद के योग से बनती हैं।

जिन शिशुओं को किसी कारण यश प्रारंभ से ही मां का दूध नहीं मिलता, उन्हें शहद चटाकर रखा जाता है। बच्चों को शहद के रूप में पूर्ण भोजन मिल जाता है तथा आंतों में आसानी से पच जाता है।

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शहद में जीवन-शक्ति है

शहद में इतने गुण हैं कि पेट में पहुंचने पर उसे पाचन क्रिया को संचालित करने की आवश्यकता नहीं होती। आमाशय की पाचन ग्रंथियों से जो पाचक रस छूटता है शहद उसे तुरंत ग्रहण कर लेता है तथा पाचक तत्त्वों को जीवनी शक्ति के रूप में परिवर्तित कर देता है।

इसको किसी भी रूप में खाने से बच्चों का विकास तीव्र गति से होता है। शहद में सभी रोगों को नष्ट करने की शक्ति होती इसलिए उन्हें किसी प्रकार का रोग नहीं लगता।

शहद सबका प्रिय क्यों ?

विशेषकर शहरों में शुद्ध शहद इतनी आसानी से नहीं मिलता, इसी कारण अनुसंधानकर्ता तथा चिकित्सक शहद का विकल्प तलाशने में लगे हैं।

आजकल बड़ी-बड़ी कंपनियां जैसे-डाबर, झंडू, वैद्यनाथ आदि पेटेन्ट दवाओं के निर्माता शहद का निर्माण बड़ी मात्रा में कर रहे हैं। कंपनी के लोग अपने-अपने शहद के शुद्ध होने का दावा करते हैं।

शुद्ध शहद न मिलने के कारण लोग इसी शहद का उपयोग करते हैं।

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शहद की शुद्धता की पहचान 

कुछ लोग कहते हैं कि शुद्ध शहद भारी होता है तथा पानी में डालने पर घुलता नहीं है अपितु बर्तन के तले में बैठ जाता है। शहद में फूलों की गंध बसी होती है अर्थात गुलाब के मकरंद से बने शहद में गुलाब की सुगंध मालूम पड़ेगी।

यदि नीम के फूलों से गंध लेती है तो वह शहद निम्बौली की महक छोड़ेगा ।

वैसे सबसे अच्छा शहद नीम की डालों पर छत्ता बनाने वाली मधुमक्खियों का होता है। शुद्ध शहद के तत्त्व मक्खी के पंखों पर चिपकते नहीं हैं इसलिए असली शहद पर मक्खियां बैठकर तुरन्त उड़ जाती हैं।

पहाड़ी मधुमक्खियों द्वारा इकट्ठा किया जाने वाला शहद अधिक उपयोगी नहीं माना जाता है, क्योंकि उसमें शोधित मकरंद का रस नहीं के बराबर होता है। मगर फिर भी यह शहद विष का हरण करने वाला और हृदय को शक्ति प्रदान करने वाला होता है।

शुद्ध शहद को रुई की बत्ती पर लगाकर जलाकर देखा जाता है।

वह सरसों के तेल की तरह जलने लगता है। लेकिन नकली शहद जलते समय शक्कर की गंध छोड़ने लगती है।

हाजमे की खराबी

कारण

आंतों की पाचन शक्ति कम होने के कारण हो जाती है। इस रोग के कारण बेचैनी होती है तथा भूख भी लगती। मल-मूत्र आदि वेगो को रोकने के कारण भी यह रोग होता है।

लक्षण

इस रोग में डकारें आती हैं, पेट में भारीपन रहता है, खाने के तुरन्त बाद उल्टी हो जाती है। सिर में दर्द होता है (जानिए – सिर में दर्द होने का कारण), किसी काम में मन नहीं लगता, आदि इस रोग के लक्षण हैं।

उपचार

  • एक चम्मच कच्चे पपीते का रस शहद में मिलाकर रोगी को पिलाएं।
  • एक नीबू के रस में, आधा चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें।
  • सोंठ, जीरा तथा सेंकी हुई हींग तीनों का चूर्ण मिलाकर शहद के साथ चाटें।
  • सेंकी हुई हींग, जीरा और सोंठ लेकर इन तीनों का चूर्ण बनाकर मिला लें, और उसे चाट लें |

पुराना बुखार

कारण

शरीर में अंदरूनी कमजोरी या खराबी के कारण बुखार नहीं टूटता। लगातार बुखार रहे, उसी को पुराना बुखार कहते हैं।

लक्षण

पुराने बुखार के कारण भूख नहीं लगती, पूरे शरीर में दर्द होता है, हड्डियों, दर्द रहता है, दिन-प्रतिदिन कमजोरी बढ़ती जाती है, किसी काम में मन नहीं लगता यह सब इस रोग के लक्षण हैं।

उपचार

  • आधा चम्मच गिलोय का चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करें।
  • आधा चम्मच भुने जीरे का चूर्ण, शहद के साथ रोगी को चटाएं।
  • दस ग्राम सोंठ का काढ़ा, शहद में मिलाकर गुनगुना करके पी जाएं।
  • थोड़ी-सी नीम की छाल को कूटकर एक कप पानी में काढ़ा बना लें | इसे छानकर तथा इसमें शहद मिलाकर रोगी को गरम-गरम पिलाएं |

कफ, पित्त तथा ज्वर

 कारण

यह ज्वर शरीर में पित्त व कफ बढ़ाने वाले भोजन के सेवन से होता है। पित्त और कफ आमाशय में विकार पैदा कर देते हैं, जिसक चलते कफ व पित्त का ज्वर आता है ।

लक्षण

इस बुखार में मुंह का स्वाद खराब हो जाता है, आंखों में जलन, आँखों में दर्द, खांसी प्यास अधिक लगती है, कभी ठंड तो कभी गर्मी लगने लगती है। यह ज्वर दिन के तीसरे पहर और रात्रि के अंतिम पहर में हल्का हो जाता है।

उपचार

  • शहद में, नीम की छाल का चूर्ण एक चम्मच मिलाकर रोगी को चटाएं।
  • सूखा धनिया, पित्त पापड़ा तथा नीम की छाल इन सबको तीन-तीन ग्राम लेकर शहद में मिलाकर इसका सेवन करें।
  • सोंठ, गिलोय, लाल चंदन और पटोल पत्र सबका तीन-तीन ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर रोगी को चटाएं।
  • तीन ग्राम यवक्षार, शहद के साथ चाटने से लाभ होता है।
  • नीबू के दो चम्मच रस में, आधा चम्मच भुने जीरा का चूर्ण डालें और दोनों को एक साथ मिलाकर इसका सेवन करें।

कब्ज

कारण

मल त्यागते समय जब जोर लगाना पड़ता है तथा बड़ी कठिनाई से मल आता है तो इसे कब्ज कहते हैं। आंतों की क्रियाशीलता क्षीण होने के कारण मल सख्त तथा कठोर हो जाता है। यह रोग समय से मल का त्याग न करने पर, छिलकेदार भोजन न करने पर, हरी सब्जियों का सेवन न करने, आदि कारणों से आंत में विकार उत्पन्न हो जाता है, जिसके कारण यह कब्ज होता है।

लक्षण

कब्ज के कारण सिर में दर्द होता है, चक्कर आते हैं, बेचैनी होती है, पेट में, वायु भर जाता है, सुस्ती छाई रहती है, पूरे शरीर में आलस्य भर जाता है। यदि कब्ज का रोग पुराना हो तो इसके कारण अंतड़ियों में कई प्रकार के रोग लग जाते हैं।

उपचार

  • लहसुन की चार कलियों की चटनी में शहद मिलाकर चाटें।
  • प्रातः खाली पेट पानी में शहद मिलाकर पिएं। थोड़े काले तिल पीसकर शहद में मिलाकर चाटें।
  •  शहद में थोड़ा-सा नीबू निचोड़कर प्रातः के समय इसका सेवन करें।
  • रात को सोते समय दूध में मुनक्का खाने के लाभ और शहद डालकर पिएं।