रोग प्रतिरोधक प्याज

प्याज

यह बात शायद ही कोई जानता हो कि प्याज की 325 किस्में पाई जाती हैं। इन सभी में सिर्फ एक ही अलग किस्म की प्याज होती है जिसकी तेज व तीखी गंध होती है जो इसकी परतों के नीचे छिपे वाष्पशील अम्ल के कारण होती है।

जब हम प्याज छीलते व काटते हैं तो यह वाष्पशील अम्ल हमारे चारों ओर फैल जाता है, जिसके कारण आँखों में पानी आने का उपचार
तथा आंखों में जलन होती है। पुरातात्त्विक व ऐतिहासिक खोजों से पता चलता है कि प्याज का सेवन हजारों वर्षों से ही किया जा रहा है।

कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि सबसे पहले मध्य पूर्व में प्याज उगाया गया तथा अपनी सरल उपज के कारण यह सारे संसार में लोकप्रिय हो गई। बाइबल में भी प्याज का वर्णन किया गया है। प्राचीन मिस्र के लोग प्याज खाने के बहुत शौकान थे। ऐसा भी कहा जाता है कि मिस्र के महान पिरामिड बनाने वाले गुलामों की शक्ति को बनाए रखने के लिए उन्हें प्याज व प्याज का रस दिया जाता था, जो कि उनके लिए किसी मूल्यवान ओषधि के समान होती थी ।

मध्य में काल से यूरोप में प्याज को एक लोकप्रिय सब्जी के रूप उपयोग किया जाता रहा है। चटनी, सूप, सॉस आदि स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। शायद ही ऐसी कोई सब्जी हो जिसमें प्याज का प्रयोग न होता हो।

संस्कृत भाषा में इसे प्लाण्डु कहते हैं, अरबी भाषा में वर्सिल तथा महाराष्ट्र और मालवा में इसे कांदा कहते हैं, अंग्रेजी में यह ऑनियन के नाम से जानी जाती है।

प्याज में सम्मिलित गुण व तत्त्व

प्याज को गरीबों की कस्तूरी व जीवनोपयोगी तत्त्वों की खान माना जाता है। गर्मी में लू से बचने के लिए यह एक रामबाण औषधि का काम करती है, इसलिए गर्मियों में इसका उत्पादन तथा प्रयोग अधिक होता है।

इसमें गंधक, लोहा, तांबा, विटामिन-सी जैसे खनिज पाए जाते हैं, जिनके कारण शारीरिक शक्ति में विकास होता है। इसके डंठल में भी किसी न किसी रूप में उपर्युक्त सभी तत्त्वों का समावेश होता है।

डंठल में खनिज लवण, वसा तथा पानी की मात्रा अधिक होती है। इसके बीजों में स्वच्छ, गुणकारी तथा रंगहीन तेल रहता है, जिसमें चूर्णक, गंधक, एल्यूमिन, अम्ल आदि मौजूद होते हैं। यह तेल उड़नशील होता है। इसीलिए, जब भी हम कच्ची प्याज का सेवन करने के बाद श्वास लेते हैं तो हमारे शरीर से श्वास के साथ दुर्गन्ध आती है जो कि असहनीय होती है।

प्याज के सेवन से भूख बढ़ती है तथा अपच दूर होती है। यह कई प्रकार के दंत रोगों से बचाती है एवं क्षय रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करती है। इसके सेवन से उच्च रक्तचाप संयमित रहता है जानिए उच्च रक्तचाप के लक्षण तथा पेशाब खुलकर आता है। प्याज में ऐसे बहुत से चमत्कारी गुण मौजूद हैं जिनके कारण हम बहुत से रोगों से कोसों दूर रहते हैं।

प्याज का सेवन निम्न रक्तचाप वाले रोगियों के लिए बहुत लाभकरी है। निम्न रक्तचाप (लो ब्लडप्रेशर) के रोगी को अधिक थकान होती है, शारीरिक कमजोरी बढ़ जाती है, मूर्च्छा भी आ जाती है। इसलिए इस रोग में कच्ची प्याज का सेवन स्फूर्ति व ऊर्जा प्रदान करता है।

मिर्गी का दौरा पड़ने पर रोगी यदि प्याज सुंघा दें, तो जल्दी ही रोगी को आराम आ जाता है। मूत्रावरोध, खांसी, जुकाम, संधिवात आदि बहुत से रोगों में प्याज अपना चमत्कारी प्रभाव दिखाती है। रक्त के थक्के जमने, रक्त प्रभाव में अवरोध आदि विकारों में भी नियमित प्याज का सेवन गुणकारी होता है। हृदय विकार, पक्षाघात, मस्तिष्क से संबंधित रोगों में प्याज एक अत्यन्त लाभकारी ओषधि है।

प्याज हानिकारक भी

जो लोग गर्म तासीर के लोग होते हैं उनके लिए प्याज का सेवन हानिकारक होता है। जिनके रक्त में यूरिक अम्ल का स्तर उच्च हो, इसके सेवन से दूर ही रहना चाहिए।

प्याज और शरीर

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खनिजों व विटामिन की जरूरत बराबर होती है, जो कि प्याज में पाए जाते हैं। कुछ अनुसंधानकर्ताओं तथा विशेषज्ञों की खोजों से यह पता चला है कि प्याज में विटामिन ए, बी, सी और इ होते हैं।

लेकिन प्याज को भूनने पर इसके विटामिन नष्ट हो जाते हैं। प्याज में शर्कर भी होती है लेकिन भूनने, तलने पर यह भी नष्ट हो जाती है। प्याज में मौजूद विटामिन इ प्रजनन संस्थान को स्वस्थ कर प्रजनन शक्ति बढ़ाती है। बच्चे की बढ़ती आयु में नित्य प्याज का सेवन कराने से चहुंमुखी विकास होता है। यदि कोई बच्चा सुस्त, निढाल तो उसे कच्ची प्याज खाने को दें तथा उनमें आए बदलाव को देखिए |