पीलिया (ज्वाइंडिस) की पहचान, लक्षण एवं घरेलू उपचार इन हिंदी

पीलिया का इलाज :-

(1) – पीपल-वृक्ष के तीन-चार नए पत्ते (कोंपले) पानी से साफ करके, मिश्री या चीनी के साथ खरल में खूब घोंटे या  सिल पर बारीक पीस लें | एक गिलास (250 ग्राम) पानी में घोलकर किसी स्वच्छ कपड़े से छान लें | यह पीपल के पत्तों का शर्बत पीलियाग्रस्त रोगी को दिन में दो बार पिलाएँ| आवश्यकतानुसार तीन दिन से सात दिन तक दे | पीलिया से छुटकारा मिल जाएगा |

(2) – गुलाबी (अथवा बढ़िया सफ़ेद फिटकरी) फूली हुई पीसकर 1/8 ग्राम से आधा ग्राम (2 से 4 रत्ती ) की मात्रा में गाय की छाछ (या दही) के साथ दिन में तीन बार पिलाने से पीलिया कुछ ही दिन में ठीक हो जाता है | आवश्यकतानुसार 3 से 7 दिन तक लें |

(3) – मूली के पत्तों और टहनियों का रास 50 ग्राम में 10 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रातः खाली पेट पीने से सब प्रकार के पीलिया में लाभ होता है और इससे एक सप्ताह के भीतर पीलिया रोग दूर हो जाता है |

पीलिया की पहचान और लक्षण – जिस व्यक्ति की आँखे, त्वचा , नख , मुँह आदि हल्दी की तरह पीले हो जाएँ , मूत्र भी पिले रंग का आए, शरीर में शिथिलता और कमजोरी अधिक प्रतीत हो, दाह अन्न से अरुचि आदि से जो विशेषतया पीड़ित हो तो समझ लें की उसे पीलिया हो गया है |

पीलिया में मंद ज्वर 99 से 100 तक रहता है | नाड़ी मन्द हो जाती है |

यह रोग पित्त की अधिकता से होता है | (बाहरी कारणों में दूषित पानी एवं खाद्य पदार्थों के सेवन से भी होता है | ) और रोगी के मल का रंग सफ़ेद या पीला रहना, मुँह सुखना, मिचली. पेट फूलना, गैस बनना, कई बार शरीर में खुजली होना,हाथ-पैरों का टूटना, ज्वर-भाव के साथ दिन-प्रतिदिन कमजोरी बढ़ती जाती है | जीर्ण पीलिया में चक्कर, भयानक खुजली विशेषकर रात में, सिरदर्द, स्मृतिहीनता, उत्साहनाश, नींद में कमी, पित्त खून में मिलकर रक्त को विषाक्त करना, यकृति और प्लीहा का बढ़ना व कड़ा पड़ जाना आदि उल्लेखनीय है |

पीलिया के परहेज एवं डाइट :- 

परहेज – घी, तेल, हल्दी, लाल मिर्च और गर्म मसलों से बानी चीजें, अचार, सम्पूर्ण खट्टे पदार्थ न खाएँ | थोड़ी मात्रा में गाय का मक्खन लिया जा सकता है | राई, हींग, तिल, गुड़, बेसन, कचालू, अरबी, मटर न लें | चने उड़द की दाल, उड़द और मैदे के भोज्य पदार्थ, केक, तले हुए पदार्थ, पित्त पैदा करने वाली और जलन करने वाली चीज़ो का सेवन बंद कर दें | धुप में घूमना, आग के पास बैठना, परिश्रम के काम करना, अधिक पैदल चलना और क्रोध, तनाव, सम्भोग आदि से बचें | धूम्रपान, शराब, मांस, मछली, चाय एवं मादक पदार्थों का सेवन ना करें | अशुद्ध पानी और अशुद्ध व बासी खाध पदार्थ का प्रयोग ना करें |

डाइट –

  1. पीलिया में गन्ने का रस लेना सर्वोत्तम है बशर्ते की रस अच्छे और साफ गन्ने का स्वच्छता से बनाया हुए हो | प्रातः गन्ने या नारंगी का रस लिया जा सकता है |
  2. संतरे का रस, कच्चे नारियल का डाभ का पानी, जौ का पानी, बेदना (मीठा अनार ) का रस, मूली के पत्तों का रस, फटे दूध का पानी दही का तोड़, काली मिर्च व जरा सा नमक मिलाकर पतली छाछ पीना हितकारी है |
  3. दूध यदि लें तो दूध में बराबर पानी मिलाकर और कुछ दाने सौंफ के डालकर अथवा दाने छोटी पीपर डालकर अथवा एक ग्राम सौंठ का चूर्ण मिलाकर लोहे की कड़ाही में गर्म किया हुआ दूध अच्छा रहता है |

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शाक – परवल, चौलाई, कच्ची मूली, घीया (लौकी), तोरई, टिंडे, पालक, पुदीना, धनिया, आंवला, टमाटर, लहसुन आदि |

फल – मीठा अनार (बेदना) मीठा संतरा, अंगूर( अंगूर के स्थान पर मुनक्का दाने या किशमिश दानों को चौदह घंटे पानी में भिगोकर प्रातः मुनक्का के बीज निकालकर किशमिश को खाकर ऊपर से बचा हूआ पानी पी लेना चाहिए) | आज कल अंगूर तथा कई फल बुहत ही ज़हरीले कृमिनाशक घोल में डुबोये जाते है | अतः अंगूर आदि इन फलों को स्वच्छ पानी से कम से कम तीन बार अच्छी तरह धोने के बाद काम में लाएँ| मौसमी, पपीता, चीकू, खजूर आदि फल भी लाभ दायक है

भोजन –

  1. खाने में पुराने गेहूँ और जौ की रोटी बिना घी की दें |
  2. चावल, खिचड़ी न दें |
  3. दलीय दें सकते है |
  4. पीलिया में जौ का सत्तू लेना और ऊपर से गन्ने का रस पीना अधिक लाभदायक है |
  5. मूँग दाल का पानी लें अथवा बिना मसाले की मूँग की दाल में कला नमक काली मिर्च मिलाकर लें |
  6. मूँग , मसूर , अरहर का सूप भो लाभकारी है |
  7. पीलिया होते ही कम से कम आठ दिन तक खटाई, लाल मिर्च व मसाले वाली चीजें तथा चिकनाई युक्त आहार का तयाग करने से जल्दी लाभ होगा |