लूज मोशन – दस्त(Diarrhoea) के लक्षण, कारण एवं घरेलु उपाय

डायरिया की रोकथाम:-

दस्त कोई रोग नहीं है| खाना ठीक से ना पचने की वजह से असाधारण रूप से पतला मल आना, बिना मरोड़ के बार-बार आना-दस्त, प्रवाहिका, अतिसार रोग है|

दस्त लगने के कारण:-

गरिष्ठ चीज़े खाना, भूख से अधिक खाना, गन्दा विषाक्त भोजन, दस्तावर दवाइयों का प्रयोग, बर्फ अधिक खाना, तेज मसाले, रात्रि जागरण, कब्ज़ आदि के प्रभाव से दस्त लग जाते है|
आँतो पर कफ की पतली झिल्ली होती है, जिससे निरंतर एक तरह का रस छूटा झरता या रिस्ता रहता है| इसी रस से भोजन पचता है भोजन न पचने, अजीर्ण से दस्त आता है| भोजन पचते समय रस को वही झिल्ली फिर सोख लेती है
परन्तु किसी कारण से झिल्ली की रस शोषण शक्ति नष्ट हो जाती है तो दस्त आने लगता है| दस्तों के कारण पेट मैं जठर शोथ(Gastritis), आंत्र शोथ(Enteritis) या जठरांत्र शोथ(Gastroenteritis) भी हो सकता है

दस्त होते ही उसका तुरंत घरेलु उपचार आरंभ कर दे| दस्त होने से शरीर में पानी और नमक की कमी अधिक मात्रा में हो जाती है | इसलिए दस्त लगने पे तुरंत “जीवन रक्षक घोल” का प्रयोग करना आरम्भ कर दे| ये घोल घर पे भी तैयार किया जा सकता है | Electrol नमक घोल आता है जो आपको किसी भी मेडिकल की दुकान पे मिल जायेगा|
इसे एक गिलास पानी में एक चम्मच घोल के हर दस्त के बाद आधे घंटे में लेते रहे|

दस्त का घरेलू उपाय:-

आंवला – सूखा आंवला एवं काला नमक सामान मात्रा में पीसकर जल के साथ आधा चम्मच की फकी लेने से दस्त बंद हो जाता है
जामुन कैसे भी तेज दस्त हों, जामुन के पेड़ की ढाई पत्तियाँ, जो न ज्यादा मोटी हों और न ज्यादा मुलायम हों, लेकर पीस लें, फिर उसमे ज़रा-सा सेंधा नमक मिलाकर उसकी गोली बना लें| एक गोली सुबह शाम लेने से दस्त तुरंत बंद हों जायेंगे|

अनार:-
15 ग्राम अनार के सूखे छिलके और दो लौंग – इन दोनों को पीस कर एक गिलास पानी में उबालें | आधा पानी रहने पर छान कर इसके तीन हिस्से करके एक दिन में घंटे के अन्तर से तीन बार पियें| जिन व्यक्तियों के पेट में आँव की शिकायत बनी रहती हों या डिसेंट्री संग्रहणी हों, उनके लिया इसका नियमित सेवन लाभकारी है|

लौकी – लौकी का रायता दस्त में लाभकारी है|

खस खस – दो चम्मच खस खस में पानी डाल कर चौथाई कप दही में मिला कर नित्य दो बार घंटे के अंतर से पेचिश, मरोड़ और दस्त ठीक हों जाते हैं | खस खस की खीर बनाकर खाने से लाभ होता हैं|

पीपल वृक्ष – पीपल वृक्ष के पत्ते दस्तों को बंद करते हैं | इसके 5 पत्तो को चबाएँ या एक गिलास पानी में उबाल कर इनका उबला हुआ पानी पियें|
केला – केला कब्ज़ करता है | दो केले आधा पाव दही के साथ कुछ दिन खाने से दस्त ठीक हों जाते है|

अमरुद – अमरुद की कोमल पत्तियाँ उबाल कर पीने से पुराना दस्त ठीक हों जाता है|

प्याज़ – प्याज़ को पीस कर नाभि पर लेप करने से दस्त बंद हो जाते है |

छाछ – दस्त होने पर सामान्य दही की लस्सी, छाछ में दो चम्मच ईसबगोल की भूसी मिला कर लेने से दस्त में लाभ मिलता है|
आधा पाव छाछ में 12 ग्राम शहद मिलाकर तीन बार पीने से दस्त बंद हो जाते है|

जायफल – सौंठ और जायफल को पीस कर पानी में मिलाकर नित्ये तीन बार पिलाने से दस्त बंद हो जाते है|

तुलसी – तुलसी के पतों का काढ़ा पीने से दस्त में लाभ होता है|

ईसबगोल – दो चम्मच ईसबगोल गर्म दूध में फुलाकर रात्रि में सेवन करें | प्रातः दही से भिगोकर फुलाकर उसमे नमक, सौंठ, जीरा मिलाकर पिलायें| कुछ दिन लगातार सेवन करने से दस्त में आँव निकलना बंद हो जायेगा|

जीरा – पतले दस्त होने पर जीरे को सेक कर आधा चम्मच शहद में मिलाकर चार बार नित्ये चांटे| खाने के बाद छाछ में सिका हुआ जीरा काला नमक मिलाकर पियें | दस्त बंद हो जायेंगे|

नीम – एक ग्राम नीम के बीज की गिरी थोड़ी-सी चीनी मिलाकर, पीस कर पानी में फँकी लें दस्त में आराम मिलेगा|

धनिया – एक चम्मच धनिये में काला नमक मिलाकर भोजन के बाद लेने से, खाने के बाद दस्त जाने की आदत छूट जाती है | केवल धनिये की फँकी से दस्त बंद हो जाते हैं